இறைவர் திருப்பெயர்: अरुणाचलेश्वर, अण्णामलैयार
இறைவியார் திருப்பெயர்: अपीतकुचाम्बा , उण्णामुलै-अम्मन
தல மரம்:
தீர்த்தம் : मंदिर के अंदर, बाहर और समीप पर्वत पर कुल मिलाकर 360 तीर्थ हैं। प्रमुख तीर्थों में ब्रह्मा तीर्थ, शिवगंगा तीर्थ, अग्नि तीर्थ और इंद्र तीर्थ हैं।
வழிபட்டோர்:सूर्य देव, प्रधाताराजन, अष्टवसु, ब्रह्मा, चंद्र, विष्णु, पुलकादिप, विश्वामित्र, पतञ्जलि, व्याघ्रपाद, अगस्त्य, सनंदन, संबंधर, अप्पर, सुंदरर, माणिक्कवाचकर, नक्कीरर, परणर , कपिल, पट्टीनत्तार , सेकिलार, इडैकाट्टु सिद्ध, अरुणगिरिनाथ , ईशान्या ज्ञानदेशिक, गुरु नमःशिवाय, गुह नमःशिवाय, रमण महर्षि, शेषाद्रि स्वामी, योगी रामसूरतकुमार, अम्मानियाम्मन और शैव एलप्पनावलर असंख्य देव, संत, सिद्ध पुरुष एवं भक्तों में से कुछ प्रसिद्ध नाम हैं।
Sthala Puranam

यह वही स्थान है जहां सूर्य, अष्टवसु, ब्रह्मा, चंद्र, विष्णु और अन्य भक्तों ने भगवान की पूजा की और आशीर्वाद प्राप्त किया।
Thirumurai Padhikams: Sambandhar - 1. உண்ணாமுலை உமையாளொடும் (1.10), 2. பூவார்மலர்கொண் டடியார் (1.69); Appar - 1. ஓதிமா மலர்கள் தூவி (4.63), 2. வட்ட னைமதி சூடியை (5.4), 3. பட்டி ஏறுகந் தேறிப் (5.5); Manikkavachakar - 1. ஆதியும் அந்தமும் (8.7), 2. செங்கண் நெடுமாலுஞ் (8.8); Songs : Sambandhar - பெண்ணாண் எனநின்ற (1.84.2), அண்ணாமலை யீங்கோயும் (2.39.2), அண்ணாவுங் கழுக்குன்றும் (3.64.1); Appar - தீர்த்தப் புனற் (6.7.2), ஊக முகிலுரிஞ்சு (6.16.5), கண்ணார்ந்த நெற்றி (6.21.8), விண்ணோர் பெருமானை (6.22.2), மூரி முழங்கொலி (6.23.5), அண்ணா மலையமர்ந்தார் (6.51.3), விண்ணோர் பரவ (6.82.2); Sundarar - தென்னாத் தெனாத் (7.2.6), கடங்களூர் திருக்காரிக் (7.31.3), தேனைக் காவல் (7.47.7); Manikkavachakar - வெளியிடை ஒன்றாய் (8.4.149), அண்ணா மலையான் (8.7.18), விண்ணாளுந் தேவர்க்கு (8.8.10); Parana - மதியாரும் செஞ்சடையான் (11.23.38,42); Sekkizhar - அண்ணாமலை மலை மேல் (12.21.313) திருநாவுக்கரசு சுவாமிகள் புராணம், அண்ணாமலை (12.28.970) திருஞானசம்பந்தர் நாயனார் புராணம்.
Specialities

नगर और मंदिर के विषय में कुछ रोचक तथ्य
पर्वत की परिधि १४ कि.मी है। पूर्णिमा के दिन इस पर्वत की परिक्रमा करना बहुत शुभ होता है।
उत्सव
कार्तिक दीप उत्सव, आषाढ़ पूरम, उत्तरायण और दक्षिणायन पुण्यकाल, चैत्र वसंत महोत्सव, स्कंध षष्ठी, मार्गशिरा पावै महोत्सव, फाल्गुन विवाहोत्सव जैसे सभी प्रमुख उत्सव विशेष रूप से मनाए जाते हैं। कार्तिक दीपोत्सव
अभिलिखित इतिहास और मंदिर शिलालेख
विजयनगर सम्राट कृष्णदेवराय ने तिरुवण्णामलै मंदिर में बीस प्रमुख विकास कार्य अपने शासनकाल में करवाया था। उनमें से प्रत्येक कार्य आज भी भक्तों को कृष्णदेवराय का स्मरण कराती है। २१७ फीट की ऊंचाई पर भव्य पूर्वी राजगोपुर, शिवगंगा तीर्थ, सहस्र स्तंभ मण्डप, इंद्र विमान, विनायक रथ, तिरुमलादेवी अम्मन समुद्रम झील, सातवें दिन का उत्सव मंडप, गर्भगृह में २ द्वार, गर्भगृह द्वारों पर सोने की परत, अपीतकुचाम्बा मंदिर के द्वार, अंबा मंदिर के द्वार पर सोने की परत, देवी के मंदिर के सामने आरामुधु (अमृत) कुआँ, अरुणाचलेश्वर और अंबाल को अर्पित “कृष्णरायण” नामक आभूषण, नागाभरण, सोने की मूर्ति और चांदी के पात्र कृष्णदेवराय की कुछ महत्वपूर्ण सेवाएं हैं।
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