logo

|

Home >

Scripture >

scripture >

Sanskrit

श्रीदूर्वेश स्तोत्रम् - Shri Doorvesha Stotram

Shri Doorvesha Stotram

 

गणनाथषण्मुखयुक्तो गिरिजासंश्लेषतुष्टहृदयाञ्जः 
दूर्वाभिख्यपुरस्थान् लोकान् परिपातु भक्तिविनययुतान् ॥१॥ 

विद्यानाथ विनीतिभक्तिसहितान् लोकान् कृपावारिधे 
दूर्वाभिख्यपुरस्थितान् करुणया पाहीभवक्त्रं यथा । 
विद्यायुःसुखयुक्तिशक्तिभिरलं युक्तान् विधायानिशं 
शान्त्याद्यैरपि दिव्यमुक्तिपदवीसन्दर्शकैः शङ्कर ॥२॥ 

इति श्रीदूर्वेशस्तोत्रं संपूर्णम् ॥
 

Related Content

nirvana-dasakam

निर्वाण दसकं - Nirvana Dasakam

जन्म सागरोत्तारण स्तोत्रम् - Janma Saagarottaarana Stotram

सन्तति प्रदम् अभिलाष अष्टक स्तोत्रम् - Santhathi Pradama Abh

শ্রীদূর্ৱেশ স্তোত্রম - Shri Doorvesha Stotram